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घोर कलिकाल में गौ सेवा को समर्पित : पंडित महेश चंद शास्त्री

पलसाना - आवारा होने का बोझा ढोने वाली गायों की दुर्दशा देखकर हमीरपुरा कंला के पंडित स्वःवैध भुरामल तिवाडी के घर 3 मार्च 69 को जन्मे पंडित महेश चंद्र शास्त्री ने वेद पाठी बच्चों को पढ़ाने का काम छोड़कर अब गाय की सेवा करने का संकल्प लिया। शास्त्री ने गांव में प्राथमिक शिक्षा के बाद प्रवेशिका ऋषिकुल आचार्य आश्रम लक्ष्मणगढ से पास कर मथुरा से शास्त्री एवं काशी से ज्योतिष व कर्म काण्ड की शिक्षा प्राप्त कर 1996 में अपने खेत में संत सियाराम आश्रम की शुरुआत ही नही अपितु सैकडो ब्राहमण बालकों को वेद कर्म काण्ड की पढ़ाई कराना शुरू कर दिया। मगर 2009 में प्रातः भ्रमण के दौरान देखा की कुछ लोग आवारा गायों को बुरी तरह से पीट रहे हैं। तो शास्त्री ने उसी समय संकल्प लिया कि गौ सेवा नारायण सेवा है। कहकर आश्रम से निकल गए। ज्योतिष विद्या सीखने वाले बालकों को पढ़ाना छोड़कर गाय की सेवा करना अच्छा समझा। और गांव से बाहर पलासिया जोहड़ा में जहां लोग अवैध शराब का काम करते थे। गांधीवादी तरीके से  प्रेम पूर्वक हटाकर संत महात्माओं  की आवास व्यवस्था का जीर्णोद्धार करा कर  इसी जगह गौ सेवा इसी जगह शुरू करने का  संकल्प  लिया । फिर यहां से गौ सेवा को स्थानांतरित करके 2012 में श्रीमहा विष्णु कृष्ण गौशाला भगोठ का निर्माण कराकर गायों की सेवा में जुट गए। शुरुआत में 40 गायों की सेवा की शुरुआत की गई। जो आज 135 तक पहुंच गई। शास्त्री ने बताया कि गौ सेवा करने में जो आनंद है। वह कहीं नहीं है। प्रतिदिन सूर्योदय से पहले 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त  से सोने के समय तक गाय की सेवा करना अब नित्य का काम हो गया है। इतना ही नहीं जब तक सभी गायों को चारा पानी ना हो जाए तब तक खाना भी नहीं खाते हैं। भले ही कितना ही जरूरी कार्य है। शास्त्री कहते हैं पहले गौ सेवा उससे बाद में अन्य कार्य किए जाते हैं। शास्त्री गौ सेवा के पर्याय के रूप में जाने जाने लगे हैं।

क्या कहते हैं पंडित महेश चंद्र शास्त्री-- गौ माता के शरीर में 33 करोड़ देवी देवताओं का निवास होता है। गौ माता के दर्शन मात्र से ही अनेक मनोकामना पूर्ण होती है वही गौ माता को स्पर्श करने पर विभिन्न व्याधियों से छुटकारा मिलता है।



संवाददाता - पवन कुमार शर्मा