पलसाना - कहने के लिए कस्बे में राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर राजकीय सामुदायिक हॉस्पिटल बना हुआ है। मगर सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं भवन एवं संसाधन पीचसी का और सरकारी रिकॉर्ड में सीएचसी जानकारी के अनुसार 4-8- 2012 को पलसाना पीएचसी को सीएचसी में क्रमोन्नत करने के आदेश जारी हुए। उसके बाद 19- 10 - 2012 को आहरण एवं वितरण अधिकारी बनाने के आदेश चिकित्सा विभाग द्वारा जारी कर दिए गए । मगर तब से लेकर आज तक पलसाना सीएचसी को कोई बजट नहीं आवंटित किया गया । न कोई आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकी । हॉस्पिटल में गायनिक चिकित्सक ना होने के बावजूद भी करीब 70 सुरक्षित डिलीवरी प्रतिमाह होती है । वही रोज होने वाले हादसों के कारण प्रतिदिन 1- 2 एक्सीडेंट घायल हॉस्पिटल में पहुंचते हैं । वही 1 महीने में करीब 8- 10 डेड बॉडी भी आ जाती है । मगर मोर्चरी के अभाव में चिकित्सकों को ही नहीं अपितु परिजनों को भी बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है । पलसाना में मोर्चरी की कोई सुविधा नहीं है। उधर ऑपरेशन थिएटर एवं चिकित्सकों के लिए आवश्यक संसाधन, आवासीय क्वार्टर का पूरी तरह से अभाव है । जिसके चलते चिकित्सकों को हॉस्पिटल से बाहर मकान किराए लेकर रहने को मजबूर होना पड़ता है। इधर पलसाना हॉस्पिटल में 20 बेड है ,उनको बढ़ाकर 30 कर दिया जाए तो आम व्यक्ति को राहत मिलेगी। बताया कि हॉस्पिटल में करीब 350 का आउटडोर है । हॉस्पिटल राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण सबसे ज्यादा सड़क हादसों को लेकर पुलिस यहां पहुंचती है । मगर सुविधा ना होने से अनेक बार उनको भी यहां से बैरंग लौटने के लिए मजबूर होना पड़ता है। मगर प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया । इसके लिए पहले कई बार धरना प्रदर्शन भी किए गए हैं। मगर प्रशासन अभी तक नहीं चैता।
संवाददाता - पवन कुमार शर्मा

