केंद्रीय मंत्री ने कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा
धवा (जोधपूर) - स्थानीय सांसद और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्य में कानून-व्यवस्था पर अशोक गहलोत सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लॉ एंड ऑर्डर के मामले में पूर्ण रूप से फेल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री ही गृह मंत्री का दायित्व निभा रहे हैं। मुझे लगता है कि यह राजस्थान सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति है।
जोधपुर में शनिवार को मीडिया से बातचीत में शेखावत ने कहा कि राजस्थान आज देश की आपराधिक कैपिटल बन रहा है। जो अपराध राजस्थान में कभी नहीं किए जाते थे, वैसे सारे अपराध राज्य में हो रहे हैं। अपराधियों को छुड़ाया जा रहा है। महिलाओं के प्रति अत्याचार में राजस्थान देश में अव्वल और गैंगरेप की घटनाओं में शीर्ष पर पहुंचा है। राजस्थान की धरती, जहां माता-बहनों का सम्मान अद्वितीय था, वहां महिलाओं के प्रति ऐसे अत्याचार होना दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
किस बात का जश्न मना रही सरकार
राज्य सरकार के दो साल पूरे होने पर जश्न मनाने पर शेखावत ने कहा कि मैं तो मीडिया के माध्यम से पूछना चाहता हूं कि ये किस बात का जश्न और खुशी मना रहे हैं। आप ने बिजली का बिल बढ़ाया, ये लेकर जनता के सामने जा रहे हैं। किसानों को 836 रुपए प्रति माह अनुदान मिलता था, वो समाप्त कर दिया, उसे लेकर जनता के सामने जा रहे हैं। किसानों का ऋण माफ नहीं कर पाए, इस विफलता को लेकर जनता के सामने जा रहे हैं। कोटा के जेके लोन और दूसरे अस्पतालों में बच्चों की असमय मृत्यु पर माता-पिता के क्रंदन को लेकर जनता के सामने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि सरकार किस बात का जश्न मना रही है।
एलिवेटेड रोड सामूहिक खुशी का अवसर
जोधपुर में एलिवेटेड रोड की स्वीकृति पर केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री और गडकरी ने शहर की एलिवेटेड रोड की बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा किया। पिछले 15 साल से यह मांग चली आ रही थी। जोधपुर के लिए यह बड़ी सौगात है। राज्य सरकार ने कोई सहयोग नहीं किया, के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं ऐसा कहना नहीं चाहता। अब इन विषयों पर चर्चा बेमानी है कि किसने सहयोग किया, किसने नहीं किया। ये हम सब जोधपुर वासियों के लिए सौगात है और सबके लिए सामूहिक खुशी का अवसर है।
किसान आंदोलन पर विपक्ष बेनकाब
दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन पर शेखावत ने कहा कि यह प्रायोजित आंदोलन है। तथाकथित राजनीतिक पार्टियां, जिनको जनता ने चुनाव में नकार दिया, वो अपना अस्तित्व बचाने के लिए इश्यू बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी पोल खुल चुकी है। कांग्रेस का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने खुद अपने घोषणा पत्र में लिखा, वो पार्टी और उस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अभियान चलाकर हस्ताक्षर राष्ट्रपति को देकर आते हैं। अपने आप में ये लोग जनता के सामने बेनकाब हुए हैं। मैं यह मानता हूं कि 21वीं सदी के भारत के लोग इस बात को अच्छी समझते हैं।
संवाददाता - राजूराम पटेल धवा

