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रानीखेत बीमारी तो नहीं

जोधपुर में रोजाना कौवों की रहस्य मौतों से सब हैरत में; पक्षीप्रेमियों ने कहा- यही हाल रहा तो जोधपुर में कौवे ढूंढ़े नहीं मिलेंगे

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही सकेगा खुलासा

विशेषज्ञों ने जताई रानीखेत में बीमारी की आशंका


धवा (जोधपुर ) - शहर में पहले से कम कौवों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कुछ दिन से लगातार कौवों की अकाल मौत हो रही है। पक्षियों की दाना-पानी के स्थान के निकट करीब एक सप्ताह से रोजाना कौवे मृत मिल रहे हैं। इनकी संख्या बढ़ने पर हरकत में आए पक्षी प्रेमियों ने इसकी जांच की आग्रह किया है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि हो सकता है कि कौवे रानीखेत नाम की संक्रामक बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। हालांकि इसका खुलासा तो उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही हो पाएगा।

जोधपुर में सबसे पहले सात दिन पूर्व राजीव गांधी पुलिस थाने के पास स्थित भोमिया की थान पर पक्षियों के दाना-पानी वाले स्थान पर कुछ कौए मृत पाए गए। इसके बाद से लगातार वहां पर 8 से 10 कौवे मृत पाए जा रहे हैं। आज इनकी संख्या में एकाएक बढ़ोतरी हो गई। आज करीब 25 कौवे वहां मृत मिले। जबकि निकट ही स्थित चौपासनी स्कूल क्षेत्र में दस और कौवे मृत पाए गए।

इसके बाद पक्षी प्रेमियों ने वन विभाग से संपर्क साध कौवों की जान बचाने में मदद मांगी। पक्षी प्रेमियों का कहना है कि शहरी क्षेत्र में पहले से कौवों की संख्या बहुत सीमित हो चुकी है। यदि यहीं हालात रहे तो अगले कुछ दिन में कौवे देखने तक को नहीं मिलेंगे।

पक्षी प्रेमियों का कहना है कि कोई विषाक्त पदार्थ खाने से कौवों की मौत हो रही है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कौवा सबसे चतुर पक्षी है। यदि कुछ कौवों की विषाक्त पदार्थ खाने से मौत हुई होती तो अन्य कौवे उस भोजन की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखते। ऐसे में कौवों की मौत का सबसे बड़ा कारण कोई बीमारी ही है।

क्या है रानीखेत रोग

रानीखेत रोग एक विषाणुजन्य रोग है, जो घरेलू पक्षियों (जैसे मुर्गी) तथा अनेकों जंगली पक्षी प्रजातियों को प्रभावित करती है। दो तीन दिन में ही पक्षी बहुत कमजोर हो जाते हैं। इसमें मृत्यु दर भी अधिक होती है। यह रोग काफी बरस पहले सर्वप्रथम उत्तराखंड के रानीखेत में देखा गया था। इसके बाद इसका नाम भी रानीखेत पड़ गया।

यह रोग सूक्ष्म रोगाणु द्वारा बहुत तेजी से संक्रमित है। संक्रमण का नियंत्रण तथा उपचार समय रहते न होने से रोग महामारी की तरह फैल जाता है। इससे मुर्गी पालकों को अपार क्षति होती है। मुर्गियों को होने वाला एक भयंकर संक्रामक रोग रानीखेत है। मुर्गियों को इस रोग से बचाने के लिए टीकाकरण भी किया जाता है। लेकिन कौवों में ऐसा करना संभव नहीं है। यह अन्य पक्षियों में भी पाया जाता है।




संवाददाता - राजूराम पटेल धवा