अपने मवेशियों को लेकर देवासी और गूर्जर समाज के पशुपालक है परेशान।
जैतारण : कस्बे के बलून्दा, रमावास, लोटौती, बस्सी सहित कई गांवों के भेड़,बकरी पालक मध्यप्रदेश के जंगलों में भूख से बेहाल, आस पास के गांवो से खाने पीने का सामान मिल रहा दो गुनी रेट पर, लांक डाउन के चलते गांवों में घुसना हुआ मुश्किल, जानवरों के खरीददार नहीं आने से पैसा भी हुआ खत्म, एमपी सरकार का नहीं है इस तरफ कोई ध्यान, अपने मवेशियों को लेकर देवासी और गूर्जर समाज के पशुपालक राजस्थान व एमपी की सरहदों में अपने जानवरों को लेकर जंगलों में ही बसेरा करतें हैं, पानी की कमी के चलते एमपी की सीमाओं में निकल जाते हैं, मौजूदा दौर में पूरे भारत में लोक डाउन के चलते खाने पीने की वस्तुओं के भाव दो से तीन गुना ज्यादा बढ़ा देने से और सामान उपलब्ध नहीं होने से इन पशुपालकों की हालत खस्ता हो गई है, एमपी सरकार से अनुरोध है इन पशुपालकों तक खाने पीने की वस्तुओं को पहुंचा कर इन्हें राहत पहुंचाने में सहयोग करें, एडवोकेट देवाराम कटारिया ने एमपी सरकार से इन पशुपालकों के लिए खाने पीने की वस्तुओं को पहुंचाने की अपील की हैं।
जैतारण : कस्बे के बलून्दा, रमावास, लोटौती, बस्सी सहित कई गांवों के भेड़,बकरी पालक मध्यप्रदेश के जंगलों में भूख से बेहाल, आस पास के गांवो से खाने पीने का सामान मिल रहा दो गुनी रेट पर, लांक डाउन के चलते गांवों में घुसना हुआ मुश्किल, जानवरों के खरीददार नहीं आने से पैसा भी हुआ खत्म, एमपी सरकार का नहीं है इस तरफ कोई ध्यान, अपने मवेशियों को लेकर देवासी और गूर्जर समाज के पशुपालक राजस्थान व एमपी की सरहदों में अपने जानवरों को लेकर जंगलों में ही बसेरा करतें हैं, पानी की कमी के चलते एमपी की सीमाओं में निकल जाते हैं, मौजूदा दौर में पूरे भारत में लोक डाउन के चलते खाने पीने की वस्तुओं के भाव दो से तीन गुना ज्यादा बढ़ा देने से और सामान उपलब्ध नहीं होने से इन पशुपालकों की हालत खस्ता हो गई है, एमपी सरकार से अनुरोध है इन पशुपालकों तक खाने पीने की वस्तुओं को पहुंचा कर इन्हें राहत पहुंचाने में सहयोग करें, एडवोकेट देवाराम कटारिया ने एमपी सरकार से इन पशुपालकों के लिए खाने पीने की वस्तुओं को पहुंचाने की अपील की हैं।


