काली पट्टी बांधकर वेतन कटौती का किया विरोध।
पाली :- रेस्टा जिला प्रवक्ता इंद्र सिंह ने बताया कि राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ भामस व राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ रेस्टा के संयुक्त तत्वाधान में रा.उ.मा. वि.राणावास में काली पट्टी बांधकर कर्मचारियों की वेतन कटौती का राज्य सरकार के अनेतिक निर्णय का सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया गया।भामस जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया की राज्य सरकार विधायकों, मंत्रियों ,के विदेश खर्चे व इनोवा की खरीदारी पर लाखों रुपए खर्च कर रही है व दूसरी ओर कोरोना के नाम पर सरकारी कर्मचारियों के वेतन से कटौती करने का प्रस्ताव कर रही है जो कि सभी कर्मचारियों के ऊपर कुठाराघात है इसका पुरजोर तरीके से विरोध किया जाएगा। शिक्षक संघ रेस्टा के जिलाध्यक्ष परमवीर सिंह ने कहा कि शिक्षक, पुलिस व चिकित्सा कर्मचारियों के साथ ही पिछले चार-पांच महीने से कोरोना योद्धा के रूप में कार्य कर रहा है फिर भी शिक्षक के वेतन से कटौती करना उनके साथ भेदभाव पूर्ण वाली नीति है यदि सरकार यह निर्णय वापस नहीं लेती है तो सभी को मिलकर आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इस अवसर पर प्रधानाचार्य गणपत सिंह दैया, मूलाराम जाटोलिया, छगनलाल मौर्य, इंद्र सिंह, छज्जा राम, जगदीश राम, पेमाराम, कैलाश नगारची, गोविंद सिंह, श्यामलाल, मदनलाल, रेणुका शर्मा सुनीता ढाका, मनजीत सिंह, परसा राम, रमेश चंद्र, रेखा सोनी, भेरूलाल, प्रेमलता आदि मौजूद थे।
पाली :- रेस्टा जिला प्रवक्ता इंद्र सिंह ने बताया कि राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ भामस व राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ रेस्टा के संयुक्त तत्वाधान में रा.उ.मा. वि.राणावास में काली पट्टी बांधकर कर्मचारियों की वेतन कटौती का राज्य सरकार के अनेतिक निर्णय का सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया गया।भामस जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया की राज्य सरकार विधायकों, मंत्रियों ,के विदेश खर्चे व इनोवा की खरीदारी पर लाखों रुपए खर्च कर रही है व दूसरी ओर कोरोना के नाम पर सरकारी कर्मचारियों के वेतन से कटौती करने का प्रस्ताव कर रही है जो कि सभी कर्मचारियों के ऊपर कुठाराघात है इसका पुरजोर तरीके से विरोध किया जाएगा। शिक्षक संघ रेस्टा के जिलाध्यक्ष परमवीर सिंह ने कहा कि शिक्षक, पुलिस व चिकित्सा कर्मचारियों के साथ ही पिछले चार-पांच महीने से कोरोना योद्धा के रूप में कार्य कर रहा है फिर भी शिक्षक के वेतन से कटौती करना उनके साथ भेदभाव पूर्ण वाली नीति है यदि सरकार यह निर्णय वापस नहीं लेती है तो सभी को मिलकर आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इस अवसर पर प्रधानाचार्य गणपत सिंह दैया, मूलाराम जाटोलिया, छगनलाल मौर्य, इंद्र सिंह, छज्जा राम, जगदीश राम, पेमाराम, कैलाश नगारची, गोविंद सिंह, श्यामलाल, मदनलाल, रेणुका शर्मा सुनीता ढाका, मनजीत सिंह, परसा राम, रमेश चंद्र, रेखा सोनी, भेरूलाल, प्रेमलता आदि मौजूद थे।

